IPL 2026: आईपीएल 2026 की तैयारियों से ठीक पहले रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) के लिए खेलने वाले उत्तर प्रदेश के तेज गेंदबाज Yash Dayal की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। जयपुर की एक विशेष अदालत ने नाबालिग से जुड़े गंभीर आरोपों के मामले में यश दयाल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद क्रिकेट और कानून—दोनों मोर्चों पर उनके सामने चुनौती और गहरी हो गई है।
यह आदेश जयपुर महानगर प्रथम की पॉक्सो कोर्ट संख्या-3 ने सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस स्तर पर ऐसा नहीं लगता कि आरोपी को गलत तरीके से फंसाया गया है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी के पास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प अभी खुला है। ऐसे में तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं मानी जा रही, लेकिन कानूनी जोखिम बना हुआ है।
क्या है मामला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई महीने में जयपुर के Sanganer Sadar Police Station में यश दयाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत में 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा आरोप लगाए गए कि क्रिकेट में करियर बनाने का झांसा देकर लंबे समय तक यौन शोषण किया गया। पुलिस ने पीड़िता के मोबाइल फोन से प्राप्त चैट, तस्वीरों और वीडियो के आधार पर पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर धाराएं लगाई गईं। वहीं, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और मामले को आपसी सहमति व गलतफहमी का परिणाम बताया है। कानून के अनुसार, मामले की अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
अदालत का रुख
अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच को प्रभावित होने से बचाने के लिए अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने अभियोजन की दलीलों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार आरोपी के पास सुरक्षित है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, पॉक्सो जैसे मामलों में अग्रिम जमानत मिलना अपेक्षाकृत कठिन होता है, खासकर तब जब शिकायतकर्ता नाबालिग हो और डिजिटल साक्ष्य मौजूद हों। ऐसे मामलों में अदालतें जांच के शुरुआती चरण में सख्ती बरतती हैं।
बचाव पक्ष की दलीलें
यश दयाल के वकील का कहना है कि आरोप निराधार हैं। बचाव पक्ष के मुताबिक, कथित मुलाकातें सार्वजनिक स्थानों पर हुईं और पीड़िता ने स्वयं को बालिग बताया था। साथ ही, यह भी दावा किया गया कि आर्थिक तंगी का हवाला देकर पीड़िता ने अलग-अलग अवसरों पर आर्थिक मदद ली। वकील ने यह तर्क रखा कि मामले में तथ्यों का एकतरफा आकलन किया गया है और उच्च न्यायालय में न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है।
क्रिकेट करियर पर असर
यश दयाल हाल के महीनों में क्रिकेट मैदान से दूर रहे हैं। वह Indian Premier League में Royal Challengers Bangalore के लिए खेले हैं और घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। कानूनी अनिश्चितता के चलते उनकी खेल गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मामला लंबा खिंचता है, तो इसका असर चयन, फिटनेस कार्यक्रम और फ्रेंचाइज़ी की योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
आगे का रास्ता
अब निगाहें इस बात पर हैं कि यश दयाल कब और कैसे Rajasthan High Court का रुख करते हैं। उच्च न्यायालय से राहत मिलने या न मिलने पर आगे की रणनीति तय होगी। फिलहाल, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अदालत का अंतिम फैसला इंतजार कर रहा है।
नोट: यह रिपोर्ट पुलिस और अदालत में दर्ज तथ्यों व दलीलों पर आधारित है। आरोप सिद्ध होना बाकी हैं और कानून के तहत आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक दोष सिद्ध न हो।








