एम्स की स्टडी में बड़ा खुलासा, स्क्रीन टाइम से बढ़ सकता है ऑटिज्म का खतरा
देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान एम्स (AIIMS) की नई स्टडी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इस रिसर्च में पाया गया है कि कम उम्र में मोबाइल, टीवी और अन्य डिजिटल स्क्रीन के ज्यादा इस्तेमाल से बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर 1 साल से कम उम्र के बच्चों में स्क्रीन के अधिक संपर्क को खतरनाक माना गया है।
एम्स के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉक्टर शेफाली गुलाटी के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम बहुत जल्दी शुरू हो जाता है और जो लंबे समय तक स्क्रीन देखते हैं, उनमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लक्षण ज्यादा पाए गए हैं। स्टडी में यह भी सामने आया कि 3 साल तक की उम्र के लड़कों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया, जबकि लड़कियों में भी कुछ लक्षण पाए गए।
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है। ऐसे समय में यदि बच्चा ज्यादा समय मोबाइल या टीवी के सामने बिताता है तो उसका असर सामाजिक व्यवहार, भाषा विकास और भावनात्मक समझ पर पड़ सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लगातार बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दे रहे हैं।
एम्स की इस स्टडी ने पैरेंट्स के बीच चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आजकल छोटे बच्चों को शांत रखने या व्यस्त रखने के लिए मोबाइल और टीवी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत भविष्य में गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
क्या है ऑटिज्म और क्यों बढ़ रही चिंता?(ऑटिज्म का खतरा)
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर यानी ASD एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चों के व्यवहार, बातचीत करने की क्षमता और सामाजिक संपर्क में बदलाव देखने को मिलता है। कई बार बच्चे सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया नहीं देते, आंखों में आंख डालकर बात नहीं करते या बोलने में देरी होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में 12 से 18 महीने की उम्र में ही इसके शुरुआती संकेत दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार माता-पिता इन संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि समय रहते पहचान और सही देखभाल बेहद जरूरी मानी जाती है।(ऑटिज्म का खतरा)
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक हर 31 में से 1 बच्चे में ASD पाया जाता है। यह आंकड़ा लगातार बढ़ती समस्या की ओर इशारा करता है।
एम्स की स्टडी में यह भी कहा गया है कि जितनी जल्दी बच्चे को स्क्रीन की आदत लगती है और जितना अधिक स्क्रीन टाइम होता है, उतना ही ऑटिज्म का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल स्क्रीन टाइम ही ऑटिज्म का कारण नहीं है, लेकिन यह जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में परिवार के साथ बातचीत, खेलकूद और सामाजिक गतिविधियां उसके मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी होती हैं। अगर बच्चा ज्यादातर समय स्क्रीन में व्यस्त रहेगा तो उसका सामाजिक और भावनात्मक विकास प्रभावित हो सकता है।
बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर क्या हैं गाइडलाइंस?(ऑटिज्म का खतरा)
बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कई संस्थाएं बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर गाइडलाइंस जारी कर चुकी हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए।
18 महीने से 6 साल तक के बच्चों को सीमित और निगरानी में स्क्रीन टाइम देने की सलाह दी जाती है। वहीं 7 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए अधिकतम 2 घंटे स्क्रीन टाइम उचित माना गया है।
डॉक्टरों का कहना है कि माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा स्क्रीन पर क्या देख रहा है। बच्चों को केवल वही कंटेंट दिखाना चाहिए जो उनकी उम्र और मानसिक विकास के लिए सही हो। इसके अलावा बच्चों (ऑटिज्म का खतरा)के साथ बातचीत करना, कहानियां सुनाना और आउटडोर एक्टिविटी में शामिल करना उनके विकास के लिए ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि माता-पिता बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं और उन्हें मोबाइल या टीवी से दूर रखने की कोशिश करते हैं, तो इससे बच्चे का मानसिक और सामाजिक विकास बेहतर होता है। लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में पैरेंट्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है ताकि बच्चों में ऑटिज्म का खतरा कम किया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि बच्चे (ऑटिज्म का खतरा)में बोलने में देरी, सामाजिक व्यवहार में बदलाव या असामान्य गतिविधियां दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय रहते पहचान और सही उपचार से बच्चे के विकास में सुधार संभव है।https://publichint.com/bird-flu-maharashtra-navapur-poultry-crisis/
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
https://www.cdc.gov/autism/index.html








