Nuclear Non-Proliferation Treaty: United Nations में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने से जुड़ी अहम संधि की समीक्षा के लिए आयोजित चार सप्ताह लंबा सम्मेलन शुक्रवार को बिना किसी सहमति के समाप्त हो गया। सम्मेलन में शामिल 191 देशों के बीच अंतिम दस्तावेज़ पर सहमति नहीं बन सकी। इस असफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है।
Nuclear Non-Proliferation Treaty: कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।
यह सम्मेलन (Nuclear Non-Proliferation Treaty)परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी (Nuclear Non-Proliferation Treaty) की 11वीं समीक्षा बैठक थी, जिसे वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था माना जाता है। Do Hung Viet, जो इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे, ने कहा कि संशोधित अंतिम दस्तावेज़ पर सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक विवाद का मुख्य कारण मसौदा दस्तावेज़ में शामिल वह प्रावधान था, जिसमें कहा गया था कि ईरान “कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।” ईरान ने इस भाषा पर कड़ा विरोध जताया, जबकि अमेरिका इस प्रावधान को बनाए रखने पर अड़ा रहा।
सम्मेलन(Nuclear Non-Proliferation Treaty) के दौरान अमेरिका ने ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कहा कि ईरान ने यूएन की परमाणु निगरानी एजेंसी के निरीक्षण में सहयोग नहीं किया और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम जारी रखा। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका और इज़राइल पर उसके परमाणु ठिकानों पर हमले कर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था। हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।
यह लगातार तीसरी बार है जब एनपीटी समीक्षा सम्मेलन किसी साझा निष्कर्ष पर पहुंचने में विफल रहा है। इससे पहले 2022 की समीक्षा बैठक भी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर विवाद के कारण बिना सहमति खत्म हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने सम्मेलन की विफलता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया में परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ रहा है, देशों को संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन का बिना सहमति समाप्त होना वैश्विक परमाणु सुरक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रमुख शक्तियां अपने मतभेद दूर नहीं करतीं, तो दुनिया में परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है।https://disarmament.unoda.org/en








