Mumbai-Pune Expressway पर चार महीने पहले हुए एक बड़े हादसे के बाद अब महाराष्ट्र सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। फरवरी 2026 में प्रोपिलीन गैस से भरा एक टैंकर पलटने के कारण एक्सप्रेसवे पर करीब 30 से 32 घंटे तक लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था। इस हादसे ने न सिर्फ हजारों यात्रियों को घंटों फंसा दिया, बल्कि राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब इस घटना की जांच के लिए गठित सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) को लगभग 250 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में सबसे बड़ा सुझाव यह दिया गया है कि खतरनाक और जहरीले केमिकल ले जाने वाले टैंकरों के लिए “वीजा जैसी अनुमति प्रणाली” लागू की जाए। यानी ऐसे वाहन बिना विशेष मंजूरी के Mumbai-Pune Expressway पर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
Mumbai-Pune Expressway में क्या हुआ था फरवरी 2026 में?
3 फरवरी 2026 को एक टैंकर, जो अत्यधिक ज्वलनशील प्रोपिलीन गैस लेकर जा रहा था, खंडाला घाट के पास Adoshi Tunnel के करीब पलट गया था। इसके बाद गैस रिसाव शुरू हो गया और सुरक्षा कारणों से एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक रोकना पड़ा।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि हजारों लोग घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें खाना, पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलीं। हादसे के बाद प्रशासन को गैस लीक रोकने और टैंकर हटाने में 30 घंटे से ज्यादा समय लग गया।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रोपिलीन गैस बेहद खतरनाक होती है और अगर किसी चिंगारी के संपर्क में आ जाए तो बड़ा विस्फोट हो सकता है।
क्या है ‘वीजा सिस्टम’ का प्रस्ताव?
विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि:
- Hazardous chemical tankers को एक्सप्रेसवे पर चलाने से पहले विशेष अनुमति लेनी होगी
- वाहन को तय सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा
- ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा
- ऐसे टैंकरों के साथ एस्कॉर्ट वाहन चलेंगे
- SOP (Standard Operating Procedure) का सख्ती से पालन कराया जाएगा
रिपोर्ट के मुताबिक अब सिर्फ ड्राइवर ही नहीं, बल्कि केमिकल निर्माता कंपनियां, रिफाइनरियां और ट्रांसपोर्ट कंपनियां भी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगी।
Mumbai-Pune Expressway सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद विशेषज्ञों ने महाराष्ट्र की HazMat (Hazardous Material) आपदा प्रबंधन व्यवस्था में कई कमियां बताईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- तकनीकी उपकरणों की कमी थी
- प्रशिक्षित कर्मचारियों की संख्या कम थी
- आपातकालीन प्रतिक्रिया में काफी देरी हुई
- गैस रिसाव से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं थी
इसी वजह से टैंकर हटाने में लंबा समय लगा और पूरा Mumbai-Pune Expressway जाम हो गया।
सरकार और MSRDC क्या कर रहे हैं?
MSRDC और BPCL ने भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए कई कदम उठाने की बात कही है। इनमें:
- Emergency Response Teams बनाना
- एक्सप्रेसवे पर अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण तैनात करना
- ड्राइवर ट्रेनिंग मजबूत करना
- और नई सुरक्षा गाइडलाइन लागू करना शामिल है।
सरकार का मानना है कि अगर सख्त नियम लागू नहीं किए गए तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।
निष्कर्ष
Mumbai-Pune Expressway देश के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे में से एक है। लेकिन हालिया गैस टैंकर हादसे ने साफ कर दिया कि खतरनाक केमिकल ले जाने वाले वाहनों के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। अब “वीजा सिस्टम” जैसे प्रस्ताव से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में ऐसे हादसों और लंबे ट्रैफिक जाम से बचा जा सकेगा।https://msrdc.in/Site/Common/ProjectListDetails.aspx?ID=74&MainId=18








