नवापुर में फिर फैला बर्ड फ्लू, लाखों पक्षियों की मौत
महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले का नवापुर इलाका एक बार फिर बर्ड फ्लू की चपेट में आ गया है। पश्चिम भारत के सबसे बड़े अंडा उत्पादन केंद्रों में शामिल इस क्षेत्र में अचानक फैले संक्रमण ने पोल्ट्री उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रशासन के मुताबिक अब तक 2 लाख से ज्यादा पक्षियों को मारा जा चुका है, जबकि करीब 8 लाख अंडों को नष्ट किया गया है। लगातार तीसरी बार फैले बर्ड फ्लू ने किसानों की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।
नवापुर हर दिन लगभग 10 लाख अंडों की सप्लाई मुंबई, सूरत, नासिक और जलगांव जैसे बड़े शहरों में करता है। लेकिन 2006 और 2021 के बाद अब 2026 में फिर से फैले संक्रमण ने पोल्ट्री कारोबार को झकझोर दिया है। स्थानीय किसान बताते हैं कि हर बार बीमारी के बाद उद्योग थोड़ा और कमजोर हो जाता है।
डायमंड पोल्ट्री फार्म के मालिक 63 वर्षीय सुरेश प्रजापत ने बताया कि उन्होंने पिछले दोनों संकटों के बाद भी दोबारा कारोबार शुरू किया था, लेकिन इस बार उनकी हिम्मत टूट चुकी है। प्रशासन ने उनकी 11 हजार मुर्गियों को खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि अब उनके पास फिर से शुरुआत करने की ताकत नहीं बची है।
अप्रैल के मध्य में कई फार्मों में अचानक मुर्गियों की मौत शुरू हुई। शुरुआत में किसानों को लगा कि तेज गर्मी के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन कुछ ही घंटों में मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ने लगा। जांच के लिए भेजे गए सैंपलों में एवियन इन्फ्लूएंजा यानी बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। इसके बाद जिला प्रशासन ने संक्रमित क्षेत्र घोषित कर कड़ी पाबंदियां लागू कर दीं।
बर्ड फ्लू से पोल्ट्री किसानों पर बढ़ा आर्थिक संकट
इस बार का संक्रमण पोल्ट्री किसानों के लिए भारी आर्थिक संकट लेकर आया है। किसानों का कहना है कि उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाला मुआवजा वास्तविक नुकसान की तुलना में बहुत कम है। पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार एक मुर्गी को अंडा देने योग्य बनाने में करीब 500 रुपये तक खर्च होता है, जबकि सरकारी मुआवजा केवल 140 रुपये प्रति पक्षी दिया जा रहा है।
तौसीफ बलेसरिया नाम के किसान की 62 हजार से ज्यादा मुर्गियां खत्म कर दी गईं। इसके अलावा उनके 6 लाख अंडे और 72 टन चारा भी नष्ट हो गया। उन्होंने बताया कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है, लेकिन अब इस काम को जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है। लगातार फैल रहे बर्ड फ्लू ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
तस्लीम पोल्ट्री फार्म के मालिक अहमद धुमाडिया को इस बार करीब 1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि हर बार संक्रमण के बाद व्यवसाय को दोबारा शुरू करना पहले से ज्यादा कठिन होता जा रहा है। किसानों को अपने खर्च पर सफाई, दवाइयां और श्रमिकों की व्यवस्था करनी पड़ती है।
नवापुर पोल्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष आरिफ बलेसरिया ने बताया कि 2021 के बाद कई पोल्ट्री फार्म बंद हो चुके हैं। पहले इस इलाके में करीब 18 लाख लेयर पक्षी थे, जो अब घटकर 12 लाख के आसपास रह गए हैं। कई किसानों ने जमीन बेच दी या पोल्ट्री शेड किराए पर दे दिए। लगातार फैल रहे बर्ड फ्लू के कारण युवा पीढ़ी भी अब इस व्यवसाय से दूरी बना रही है।
किसानों ने सरकार से वैक्सीन की अनुमति देने की मांग भी की है। उनका कहना है कि यदि प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध होती, तो लाखों पक्षियों को मारने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि सरकार का कहना है कि अत्यधिक संक्रमण वाले स्ट्रेन के लिए वैक्सीन पर अभी विचार किया जा रहा है।
प्रशासन की सख्ती और भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
संक्रमण की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने नवापुर के कई इलाकों को संक्रमित और निगरानी क्षेत्र घोषित कर दिया है। संक्रमित क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे में सभी पोल्ट्री गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है, जबकि 10 किलोमीटर तक निगरानी बढ़ा दी गई है। अगले 90 दिनों तक पोल्ट्री उत्पादों और अंडों की बिक्री तथा आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा।
प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। अधिकारी लगातार फार्मों की जांच कर रहे हैं ताकि संक्रमण और न फैले। जिला कलेक्टर ने प्रभावित किसानों को जल्द मुआवजा देने का भरोसा दिलाया है।
हालांकि किसानों की चिंता केवल वर्तमान नुकसान तक सीमित नहीं है। उन्हें डर है कि बार-बार फैलने वाला बर्ड फ्लू इस पूरे उद्योग को खत्म कर सकता है। हजारों परिवारों की आजीविका पोल्ट्री व्यवसाय पर निर्भर है। यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो इस क्षेत्र में रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री उद्योग को बचाने के लिए दीर्घकालिक योजना बनानी होगी। इसमें आधुनिक निगरानी प्रणाली, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रभावी वैक्सीन और उचित मुआवजा व्यवस्था शामिल होनी चाहिए। केवल पक्षियों को मारना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता।
फिलहाल नवापुर के कई पोल्ट्री फार्मों में सन्नाटा पसरा हुआ है। फार्मों के बाहर प्रतिबंध के बोर्ड लगे हैं और प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। आने वाले कुछ महीने यह तय करेंगे कि पश्चिम भारत का यह बड़ा अंडा उत्पादन केंद्र दोबारा खड़ा हो पाएगा या नहीं।https://publichint.com/weather-news-india-6-may-2026/
https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/avian-and-other-zoonotic-influenza








