Tuesday, 4 Aug 2026
सब्सक्राइब करें
ब्रेकिंग

Deva Movie Review: मुंबई पुलिस की रीमेक बदलावों के बावजूद बेजान, क्लाइमैक्स करेगा निराश।

Deva Movie Review: शाहिद कपूर अपनी नई फिल्म ‘देवा’ के साथ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटे हैं। यह फिल्म 2013 में आई मलयालम फिल्म ‘मुंबई पुलिस’ की हिंदी रीमेक है, जिसमें पृथ्वीराज सुकुमारन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, निर्माताओं ने इसे रीमेक मानने से बचने की पूरी कोशिश की, लेकिन कहानी की आत्मा मूल फिल्म से मेल खाती है। निर्देशक रोशन एंड्रयूज ने कहानी को मुंबई की पृष्ठभूमि में ढालने के साथ ही इसमें कुछ नाच-गाने और राजनीतिक पहलुओं को जोड़ा, लेकिन यह प्रयोग दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहा।

Deva Movie Review: कहानी में क्या है खास?

फिल्म की शुरुआत होती है एसीपी देव (शाहिद कपूर) के एक्सीडेंट से, जिसके बाद उसकी याददाश्त चली जाती है। अस्पताल में उसका दोस्त डीसीपी फरहान (प्रवेश राणा) उसे उसके अतीत की याद दिलाने की कोशिश करता है। फ्लैशबैक में देव एक आक्रामक, गुस्सैल और कानून को अपने तरीके से लागू करने वाला पुलिस ऑफिसर नजर आता है। फरहान और देव की दोस्ती एसीपी रोहन डिसिल्वा (पावेल गुलाटी) से भी जुड़ी होती है।

मुंबई पुलिस एक खूंखार गैंगस्टर प्रभात जाधव (मनीष वाधवा) की तलाश कर रही होती है, लेकिन वह हर बार बच निकलता है। इसी दौरान देव को अपनी टीम के एक कांस्टेबल की पत्रकार बेटी दीया (पूजा हेगड़े) से प्यार हो जाता है। जब प्रभात मारा जाता है, तो देव उसका क्रेडिट रोहन को देता है, क्योंकि उसकी घर में कोई खास इज्जत नहीं होती। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब महाराष्ट्र स्थापना दिवस के मौके पर स्टेज पर रोहन की हत्या कर दी जाती है। देव रोहन के कातिल को ढूंढने निकलता है, लेकिन दुर्घटना के बाद वह अपनी याददाश्त खो देता है।

अब शांत और संयमित हो चुका देव एक बार फिर अपने दोस्त फरहान की मदद से हत्यारे की तलाश में जुटता है।

Deva Movie Review: अमिताभ बच्चन की ‘अग्निपथ’ की याद दिलाती है।

निर्देशक रोशन एंड्रयूज की यह पहली हिंदी फिल्म है, लेकिन उनकी कहानी की गति काफी धीमी है। इंटरवल से पहले फिल्म बहुत सुस्त लगती है और देव के अतीत को खोलने के लिए बहुत अधिक समय लेती है। एक सीन में डॉक्टर कहती है, “एक्सीडेंट से पहले तुम देव ए थे, अब देव बी हो गए हो।” लेकिन देव की इस मानसिक स्थिति को फिल्म में गहराई से दिखाने की कोशिश नहीं की गई।

फिल्म में दोस्ती (Deva Movie Review) अपराध, दोषसिद्धि और मुक्ति जैसे भारी विषय हैं, लेकिन इनका प्रस्तुतिकरण ठोस नहीं है। गैंगस्टर प्रभात जाधव को पकड़ने और मारने का सीक्वेंस भी रोमांचक नहीं लगता। फिल्म का सेटअप धारावी की गलियों में रखा गया है, लेकिन वहां के माहौल को बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। यह पूरी सेटिंग कहीं न कहीं अमिताभ बच्चन की ‘अग्निपथ’ की याद दिलाती है। देव और दीया की प्रेम कहानी भी बेहद कमजोर है और फिल्म की मुख्य कहानी में कोई खास योगदान नहीं देती।

Deva Movie Review: क्लाइमैक्स करेगा निराश।

फिल्म का क्लाइमैक्स सपाट और निराशाजनक है। मूल फिल्म ‘मुंबई पुलिस’ की तुलना में यहां देव की मन:स्थिति और उसके कार्यों के दुष्परिणामों को लेकर कोई आत्ममंथन नहीं दिखाया गया। भावनात्मक दृश्यों में गहराई की कमी साफ झलकती है, जिससे दर्शकों को फिल्म से जुड़ने में परेशानी होती है।

Ad

दीया का किरदार मूल फिल्म में नहीं था और अगर इसे इस फिल्म में भी न रखा जाता, तो कोई फर्क नहीं पड़ता। पत्रकार होते हुए भी उसका किरदार कहानी में कोई खास योगदान नहीं देता। देव का अपनी शादीशुदा पड़ोसन के साथ संबंध दिखाने का प्रसंग भी बहुत सतही लगता है।

Deva Movie Review: पूजा हेगड़े को फिल्म में ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला है।

शाहिद कपूर पहले भी ‘हैदर’, ‘उड़ता पंजाब’ और ‘कबीर सिंह’ जैसी फिल्मों में आक्रामक और सनकी किरदार निभा चुके हैं, इसलिए ‘देवा’ (Deva Movie Review) में उनका किरदार ज्यादा प्रभावित नहीं करता। हालांकि, वह आक्रामक से शांत देव बनने की प्रक्रिया में सहज दिखते हैं। पूजा हेगड़े को फिल्म में ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला है, जिससे उनका किरदार प्रभावहीन लगता है।

प्रवेश राणा ने डीसीपी फरहान के रूप में अच्छा काम किया है, जबकि पावेल गुलाटी मासूम लगते हैं, लेकिन उनके और शाहिद कपूर के टकराव वाले दृश्य ज्यादा प्रभावशाली नहीं बन पाए हैं। सहायक किरदारों में कुब्रा सैत भी औसत लगीं।

तकनीकी रूप से देखा जाए तो एडिटर ए श्रीकर प्रसाद की एडिटिंग फिल्म की लंबाई को कम कर सकती थी, जिससे कहानी ज्यादा प्रभावी बनती। विशाल मिश्रा का संगीत भी औसत है और कोई भी गाना यादगार नहीं बन पाया। सिनेमेटोग्राफर अमित राय ने मुंबई की दुनिया को बखूबी कैमरे में कैद किया है, लेकिन अगर फिल्म की पटकथा और टाइट होती, तो यह एक बेहतरीन अनुभव बन सकती थी।

‘देवा’ एक मजबूत कहानी होने के बावजूद अपने निष्पादन में कमजोर साबित होती है। बदलावों के बावजूद यह फिल्म मूल मलयालम फिल्म ‘मुंबई पुलिस’ जितनी प्रभावी नहीं बन पाई। क्लाइमैक्स और भावनात्मक गहराई की कमी दर्शकों को निराश कर सकती है। शाहिद कपूर के फैंस के लिए यह एक बार देखने लायक हो सकती है, लेकिन अगर आप अच्छी थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो ‘देवा’ आपको ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी।

https://www.youtube.com/watch?v=3x77q40hATw&t=52s
https://publichint.com/khushi-kapoor-with-a-mystery-man/
Ad

Leave a Comment

Bezaf Song Neha Kakkar Viral Vaibhav Suryavanshi six on Bumrah: पहली गेंद पर छक्का, IPL 2026 में धमाका “Baahubali The Epic – धमाकेदार टीज़र रिलीज़!” ‘पुष्पा 2’ स्क्रीनिंग भगदड़ मामले में अल्लू अर्जुन को बड़ी राहत… नया साल 2025 रणबीर कपूर ने आलिया भट्ट को किया किस, बेटी राहा ने चांद देख मनाई खुशी। दीपिका पादुकोण डिलीवरी के लिए अस्पताल पहुंचीं, जल्द खुशखबरी आने वाली है। कैसे एक डॉक्टर से एक्ट्रेस बनी, 10 करोड़ की नेटवर्थ RANI MUKHERJEE AND AISHWARYA CAT FIGHT: आखिर वह क्या वजह थी जिसके कारण बेस्ट फ्रेंड बन गयी एक दूसरे की दुश्मन। ARYAN KHAN NET WORTH कैटरीना की न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया उनकी फिटनेस का राज। कैसे चालीस के बाद भी कैटरीना इतनी फिट ?