NTA CBSE Review: देश की प्रमुख परीक्षा और मूल्यांकन संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 73 पूर्व वरिष्ठ नौकरशाहों ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की मूल्यांकन प्रणाली की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर कर दिया है।
पूर्व अधिकारियों ने यह मांग संविधानिक आचरण समूह (Constitutional Conduct Group – CCG) के बैनर तले जारी एक खुले पत्र में की है। इस पत्र में NEET-UG पेपर लीक विवाद और CBSE की नई On Screen Marking (OSM) डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।
NTA CBSE Review की मांग क्यों उठी?
पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि हाल के वर्षों में परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई कई खामियों ने देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा संचालन और मूल्यांकन से जुड़ी संस्थाओं की पारदर्शिता तथा जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं।
खुले पत्र में कहा गया है कि NTA CBSE Review के माध्यम से परीक्षा प्रणाली की कमियों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
NEET-UG पेपर लीक का भी जिक्र
पत्र में NEET-UG परीक्षा का विशेष उल्लेख किया गया है। पूर्व अधिकारियों के अनुसार, पेपर लीक की घटना ने 23 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य और सपनों को प्रभावित किया।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में बार-बार सामने आ रही खामियों के कारण कुछ उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र पहले से प्राप्त होने की आशंका बनी रहती है। इससे लाखों मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होता है और पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर भी सवाल
NTA CBSE Review की मांग करने वाले पूर्व अधिकारियों ने CBSE की On Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर भी चिंता जताई है।
पत्र के अनुसार, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू होने के दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। इनमें पोर्टल क्रैश होना, उत्तर पुस्तिकाओं के कुछ पन्नों का गायब होना, उत्तर पुस्तिकाओं का गलत मिलान और अंकन में त्रुटियां शामिल हैं।
पूर्व अधिकारियों का दावा है कि भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों में मूल्यांकन संबंधी समस्याओं की शिकायतें अधिक सामने आईं।
परिणामों पर भी असर का दावा
खुले पत्र में यह भी कहा गया है कि OSM प्रणाली को जल्दबाजी में लागू किए जाने के कारण परीक्षा परिणामों पर असर पड़ा हो सकता है। पूर्व अधिकारियों ने दावा किया कि पिछले वर्षों की तुलना में उत्तीर्ण प्रतिशत और शीर्ष अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या में कमी देखने को मिली।
हालांकि इस संबंध में CBSE की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
किन प्रमुख हस्तियों ने किया समर्थन?
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित पूर्व अधिकारी शामिल हैं। इनमें पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, पूर्व स्वास्थ्य सचिव के. सुजाता राव, पूर्व पंजाब पुलिस प्रमुख जूलियो रिबेरो, पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा और पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग जैसे नाम शामिल हैं।
इन अधिकारियों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए परीक्षा संस्थाओं की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा बेहद जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने की मांग
पूर्व नौकरशाहों ने सरकार से आग्रह किया है कि NTA CBSE Review के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, जो परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी प्रणालियों की व्यापक जांच करे।
उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो देश की परीक्षा प्रणाली पर छात्रों और अभिभावकों का विश्वास और कमजोर हो सकता है।
फिलहाल इस मांग ने शिक्षा जगत और नीति निर्माताओं के बीच नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।https://www.nta.ac.in








